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मंगलवार, 21 फ़रवरी 2023

शुरुआत जरूरी है

 शुरुवात जरूरी है…!!

मन में है जो, वो बात जरूरी है
छा रहा अँधेरा घोर,
अब हर चिराग जरूरी है.

बदल रही है दुनिया सारी, बदल रहा प्रकृति भी
तेज नही धीरे ही सही,
पर बदलाव जरूरी है..
झूठी शान और परंपरा का,
बहिस्कार जरूरी है..
कोई डरा रहा ,कोई सहमाँ है,
कोई मूक,कोई वाचाल यहाँ
ध्वस्त करो यह रूढ़िवाद,
अब पुनरुत्थान जरूरी है..
मंजिल मिले या हार
ये बाद में तय होगा,
ठहरे रहे बहुत,
अब प्रस्थान जरूरी है..
जो होगा सो होगा अंजाम,
मगर आगाज जरूरी है..!
कुछ भी नहीं असंभव
बस शुरुवात जरूरी है…

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