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रविवार, 28 जनवरी 2024

प्रतिभा बनाम क्षमता और सफल जीवन का राज


आत्म बोध 

जीवन को अधिक, स्पष्टता,  उद्देश्य और जुनून के साथ जीने की इस यात्रा को आत्म-बोध कहा जाता है। हमें हमारी मानवीय क्षमता को समझना इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 
अपनी क्षमता का विकास करना एक सक्रिय प्रक्रिया है जो जीवन भर चलती रहती है
अपने काम का सम्मान करें 
आप जो काम कर रहे हैं उसे पूरे मन और सम्पूर्णता से करें उसमें आत्म सम्मान और और गर्व महसूस करें। याद रखें कि यह यात्रा आपके लिए है, किसी और के लिए नहीं।
रोज कुछ नया सीखें और अभ्यास करते रहें
ज़ब आप रोज कुछ सीखते हैँ  रोज अभ्यास करते है खुद को व्यस्त रखने के साथ साथ इनर वर्क करते हैँ  तो आप अधिक केंद्रित, उत्पादक, रचनात्मक पाएंगे  कम थके हुए पाएंगे और अपना बेस्ट या सर्वश्रेष्ठ दे पाएंगे
अपनी प्रतिभा के साथ साथ क्षमता का भी आकलन करें
हमारी क्षमता की कोई सीमा नहीं है। व्यावहारिक अर्थ में, मस्तिष्क हमारे पूरे जीवन तक बढ़ता और बदलता रह सकता है जो हम सोच सकते हैँ उसे साकार भी कर सकते हैं|
एक अच्छा प्रबंधक अच्छा कोच और अच्छा प्रेरेक आपकी प्रतिभा के साथ साथ आपकी क्षमता को भाम्प लेता है और उस कार्य और अभ्यास करने को उकसाता है और आप बेहतर करने लगते हैँ और क्षमता के अनुरूप कार्य मे सफल होतेहै
प्रतिभा बनाम क्षमता
प्रतिभा आपकी प्राकृतिक, स्वाभाविक या जन्मजात क्षमता है व्यक्तिगत योग्यता है जो आप के पास है
जबकि क्षमता या पॉटशियल क्षमता भविष्य को संदर्भित करती है। प्रतिभा वर्तमान को आप भविष्य कितना अधिक कर सकते हैं ये आपकी क्षमता है पॉटशियल है |
जीवन सार्थक करने के लिए लक्ष्य निर्धारित करें


आपके जीवन में यदि कोई लक्ष्य नहीं है तो कोई भी आपका सम्मान नहीं करेगा समझ में इस व्यक्ति का सम्मान होता है जो जिसके लक्ष्य होता है और निरंतर कार्यरत होता है
पर लक्ष्य के पीछे भागते-भागते हम सुख और शांति भी खो देते हैं सबसे पहले तो हमें खुद को पहचानना चाहिए हमारी क्षमताओं का आकलन होना चाहिए
लक्ष्य निर्धारित करने का अर्थ यह नहीं है कि आप कोई कोई भी बड़ा लक्ष्य पूजा लक्ष्य बना ले हैं और उसी के पीछे लग जाए लक्ष्य अपनी क्षमताओं के हिसाब से रखें यदि बड़ा लक्ष्य भी है तो उसे टुकड़ों में तोड़े पर्याप्त समय समय रखें ताकि आपको कोई जल्दबाजी न रहे और निराश ना हो लक्ष्य पूरा न होने पर बहुत तनाव होता है इसलिए छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं एक बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमेशा सकारात्मक रहे हैं पॉजिटिव सोचें ऐसा भी होता है या ऐसा भी समय आता है कि जब हम अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाते इसका अर्थ यानी कि अपने प्रयास ही नहीं किया या आप कुछ भी हासिल नहीं कर सकते सपना टूटने पर आप सपने देखना बंद ना करें सपने देखते रहें यह नहीं तो कोई और सही कोई दूसरा लक्ष्य बनाएं उसे आप जरूर प्राप्त कर लेंगे कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है

रविवार, 7 जनवरी 2024

प्रतियोगिता और जीत-हार जीवन का हिस्सा है

 प्रतियोगिता अर्थात कॉम्पिटिशन शादियों से से चलता रहा है कभी  उत्तराधिकारी चुनने, वर  चुनने का या फिर कोई अधिकारी या  नेता का चुनाव हो प्रतियोगिताएं होती रहतीहैं

मौजूद विकल्प में से किसी एक को चुनना बेहतर का चुनाव करना प्रतियोगिता का उद्देश्य होता है, प्रतियोगी  परीक्षाओं में  किसी एक सीट के लिए सौ से हजार लोग कॉम्पटीकरते हैं , फाइट करते हैं मिलती सिर्फ एक को है इसका मतलब ये नहीं कि बाकी 99 या 999 प्रतियोगी बेकार है सौ या हजार में से 10 से 100 लोग ऐसे होते हैं जो उस सीट को डिजर्व करते हैं जिसे मिली है उनके बराबर योग्यता रखते हैं पर इस बार अवसर उन्हें नहीं मिला अगली बार जरूर मिलेगा इसलिए हतोत्साहित हुए बिना रिस्टार्ट करें |
जो हारते,फेल होते  हैं या जिनको पद नहीं मिलता उनको समझना  चाहिए कि  खुद को सुधारने अधिक तैयारी और भूमिका बनाने और सीखने का समय मिला है
मंज़िल तक पहुंच कर भी न मिलना बहुत कष्ट देता है पर निराशा से कुछ नहीं हासिल होता अगले अवसर के लिए जुट जाएं  अगला अवसर आप को ही मिलेगा |
बहुत लोगों की कहानियां आप ने सुनी या पढ़ी होगी किसी फील्ड में चीज के लिए  1 साल 2 साल और 5 साल लगा दिए फिर उन्हें मिली कई लोगों नहीं इतने सालों में भी ĺनहीं मिली और  वो हार  नहीं  माने किसी दूसरे फील्ड में अच्छा कर रहें हैं  और सफल हैं
गोपाल दास नीरज जी की कविता की ये पंक्ति हमेशा याद रखिए
कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है

और हरिवंशराय बच्चन जी की कविता
जो बीत गई सो बात गई

अम्बर के आनन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
जो छूट गए फिर कहाँ मिले
पर बोलो टूटे तारों पर
कब अम्बर शोक मनाता है
जो बीत गई सो बात गई
#competition #lifestyle #karma

मंगलवार, 2 जनवरी 2024

दया, धैर्य, विनम्रता और सहनशीलता जीवन का मूलमंत्र है

एक शेर की वीरता तब और बढ़ जाती है जब भटक के आये हुए मेमने को दुलारकर पुचकार कर छोड़ देता है उस पर दया दिखता है
दया और सहनशक्ति हमें शक्तिशाली बनाती है
हिन्दी मीडियम के 11th क्लास इग्लिस सब्जेक्ट में विलियम सेक्सपियर की कविता थी मर्सी आप मे से बहुतों ने पढ़ी होगी जो 12th हिंदी मीडियम से पास हैं वो पढ़े होंगे जो 12th की के इंग्लिश सब्जेक्ट में शेक्सपियर के एक प्ले (नाटक) मर्चेन्ट ऑफ वेनिस का हिस्सा है जिसके प्रमुख पात्र एंटोनियो, पोर्शिया बासियानो औऱ सायलाक हैं पोरशिया सायलाक को मर्सी मतलब दया के बारे में बताती है वो बताती है दया देने वाले और प्राप्त करने वाले दोनों को सुख देता है और  भला करती है यदि दया एक राजा के ह्रदय में प्रेवेश करा दिया जाए तो वो धरती पर भगवान की तरह हो जाएगा। विनम्रता, धैर्य सहनशीलता और दया जीवन का मूलमंत्र है

विद्या ददाति विनयम
गहरा जल शांत होता है और फलों से लदे हुए पेड़ झुके होते हैं
अष्टावक्र ने कहा है जिसमें विनय नहीं वह विद्धवान नहीं।

सहनशीलता एक ऐसा सत्य है, जिससे प्राय: सभी लोगों को अपने जीवनकाल में रू-ब-रू होना पड़ता है। सहनशील होना एक गुण है, जिससे जीवन का वास्तविक विकास होता है।
सहनशीलता दया और त्याग परिवार से सीखने को मिलता है आज हमारे जीवन में दुख और तनाव हावी हैं। इसका परिणाम यह है कि हम थोड़े से कष्टों से शीघ्र घबरा जाते हैं, क्रोधित हो जाते हैं।
और क्रोध  मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है ।

सहनशील व्यक्ति बिगड़ते कार्य को भी संभाल ले जाते हैं। इसके विपरीत जिसमें सहनशीलता नहीं होती, उसे क्रोध आता है। क्रोध में बनते हुए कार्य भी बिगड़ जाते हैं। सहनशीलता का गुण व्यक्ति को तभी मिलता है, जब उसके अंदर अच्छे संस्कारों का समावेश हो

कविता-दंगा पीड़ित

 कविता  दंगापीड़ित ये भी था इक सपना, कि समाज से लुक भी प्यार मिले... पर मिली किताबें दुस्वारियां, और दोस्ती के घाव मिले... पल रहे हैं शिवरों...