Wikipedia

खोज नतीजे

शुक्रवार, 30 मई 2025

कविता-दंगा पीड़ित

 कविता 

दंगापीड़ित


ये भी था इक सपना,

कि समाज से लुक भी प्यार मिले...

पर मिली किताबें दुस्वारियां,

और दोस्ती के घाव मिले...

पल रहे हैं शिवरों में

जो देश का भविष्य है,

आशा थी जिसे प्रकाश की,

उन्हें बदले में अंधेरा मिले...

खुदगर्ज राजनीति के,

मासुम भी शिकार हुऎ...

क्या सोचेंगे राष्ट्रीय,

क्या समाज के लिए जियें,

बस कुंठित ना हो समाज से,

कदम कहीं..जो डगमगा गया... 


दंगा या किसी विशेष जाति या सत्ता के सताए लोगों की व्यथा और उसके परिणाम बहुत घातक होते हैं, प्रशासन प्रशासन की बैठक में उन्हें दोषी ठहराया जाता है या उनकी पहचान की जाती है तो ऐसा व्यक्ति या समुदाय सत्ता, शासन प्रशासन और मानवता से कुंठित हो जाते हैं और वो बदले की आग में जलते हैं और गलत कर शेयर करते हैं।


शनिवार, 24 मई 2025

Some Business thaught

 ग्राहक सेवा हमेशा से ही आपकी कंपनी के प्रतिनिधित्व का प्राथमिक चालक रही है। आपके ग्राहक की आपके प्रति वफ़ादारी को किस तरह से बढ़ावा मिलता है, से लेकर आपके ग्राहक आपके उत्पादों के लिए अपनी जेब कैसे खोलेंगे, सब कुछ आपकी ग्राहक सेवा पर निर्भर करता है।


अध्ययनों से पता चलता है कि 95% उपभोक्ता ब्रांड के चुनाव और ब्रांड के प्रति वफ़ादारी में ग्राहक सेवा को महत्वपूर्ण मानते हैं। बेहतरीन ग्राहक सेवा प्रदान करके और एक अच्छी ग्राहक सेवा भूमिका निभाकर , आप निश्चित रूप से बाज़ार पर राज करने के लिए अपने प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त हासिल करते हैं।

मैंने सीखा है कि लोग भूल जाएंगे कि आपने क्या कहा, लोग भूल जाएंगे कि आपने क्या किया, लेकिन लोग कभी नहीं भूलेंगे कि आपने उन्हें कैसा महसूस कराया" - माया एंजेलो



माया एंजेलो, एक कवि, एक नागरिक अधिकार कार्यकर्ता, 30 से अधिक पुस्तकों की लेखिका, 50 से अधिक मानद उपाधियों की प्राप्तकर्ता, और 30 स्पोकन वर्ड एल्बमों के लिए 3 ग्रैमी पुरस्कार विजेता। माया की टोपी पंखों से भरी हुई थी। उन्होंने एक सफल जीवन जिया और लाखों लोग उनसे, उनके काम से प्रेरणा लेते हैं।

असुविधा और आभाव को अपनी ताकत बनानी चाहिए

 आभाव, असुविधा, और मुश्किलें सब के जीवन मे हैं

पर जब हमें लगे कि हमारे साथ कुछ ज्यादा ही है
तो हमें समझ लेना चाहिए हमें अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है अधिक धैर्य रखने और समय देने की जरूरत है।
हाल ही मे फिजिक्स वाला के फाउंडर अलख पाण्डेय अलीगढ के एक लड़के गगन की सराहना और चर्चा करते हैं जो अलीगढ के अतरौली तहसील के गरीब परिवार से हैं और 2024 मे IIT मे अच्छा रैंक स्कोर कर के IIT BHU मे ECE ब्रांच मे एडमिशन लिया एक पुराने स्मार्ट फोन जिसकी स्क्रीन सालों से टूटी थी उसी से ऑनलाइन तैयारी की और IIT मे सेलेक्ट हुए
अलख पाण्डेय जी गगन को एक नया फोन दिया और उनकी पढ़ाई का खर्च पूरा करने का वादा किया
और इंट्रेस्टिंग बात ये है की गगन के पुराने स्क्रीन टूटे फोन को अपने पास रखा और कहा ये अन्य बच्चों को प्रेरित करने के लिए उन्हें दिखाने के लिए रखा.

अवधी भाषा का महत्व

 भक्तिकाल को हिन्दी साहित्य का स्वर्ण युग कहा जाता है. यह हिन्दी साहित्य का एक महत्वपूर्ण काल है. इस काल में भक्ति की ऐसी धारा प्रवाहित हुई कि विद्वानों ने इसे हिन्दी साहित्य का स्वर्णकाल कहा. भक्तिकाल की कुछ खास बातेंः 

• भक्तिकाल की दो प्रमुख शाखाएं हैं- सगुण और निर्गुण. 
• इस काल में अवधी और ब्रजभाषा का प्रयोग हुआ. 
• भक्तिकाल के प्रमुख कवि हैं- तुलसीदास, कबीरदास, रहीम, मीरा, रसखान, मलिक मुहम्मद जायसी, सूरदास इत्यादि. 
• इस काल में काव्य जीवन सापेक्ष और जनता के अधिक निकट था. 
• इस काल में समाज सुधार के लिए काव्य लिखा गया. 
• भक्तिकाल में लिखे गए कुछ प्रमुख ग्रंथ हैं- रामचरितमानस, पद्मावत, कवितावली, दोहावली, रामचरित संग्रह, भक्त माल, अष्टयाम. 
भक्तिकाल के कुछ प्रमुख कवियों और उनके कामः 
• कबीरदास की काव्य भाषा 'सधुक्कड़ी' कहलाती है.
• सूरदास के भ्रमरगीत में विप्रलम्भ श्रृंगार का अद्वितीय वर्णन है.
• कृष्णभक्ति शाखा के कवियों के काव्य का संग्रह विट्ठलनाथ ने किया, वह 'अष्टछाप
ईश्वर के सगुण और निर्गुण दोनों तरह से मानते हैं जैसे तुलसीदास जी सगुण उपासक थे और कबीर जी निर्गुण
तुलसीदास जी कहते हैं ईश्वर शून्य हो या अनंत है तो भी मै उन्हें एक रूप में पूजूँगा वहीँ 
पदम श्री मालिनी अवस्थी जी को हम जानते हैं पर
कजरी, सोहर, चैती, लंगुरिया आदि लोकगीतों की प्रसिद्ध शैलियाँ हैं। सीढ़ने गीत विवाह के अवसर पर गाये जाने वाले गाली गीत [2]है।इसके अतिरिक्त संस्कार गीत,श्रम गीत,पर्व गीत, बिरहा, पूर्वी, झूमर, खेमटा भी भोजपुरी के परम्परागत लोकगीत हैं जिन्हें लोग अपने जीवन की धारा से जोड़कर संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं इसमें लोक गीतकारों व लोक गायकों का बहुत योगदान है

रविवार, 28 जनवरी 2024

प्रतिभा बनाम क्षमता और सफल जीवन का राज


आत्म बोध 

जीवन को अधिक, स्पष्टता,  उद्देश्य और जुनून के साथ जीने की इस यात्रा को आत्म-बोध कहा जाता है। हमें हमारी मानवीय क्षमता को समझना इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 
अपनी क्षमता का विकास करना एक सक्रिय प्रक्रिया है जो जीवन भर चलती रहती है
अपने काम का सम्मान करें 
आप जो काम कर रहे हैं उसे पूरे मन और सम्पूर्णता से करें उसमें आत्म सम्मान और और गर्व महसूस करें। याद रखें कि यह यात्रा आपके लिए है, किसी और के लिए नहीं।
रोज कुछ नया सीखें और अभ्यास करते रहें
ज़ब आप रोज कुछ सीखते हैँ  रोज अभ्यास करते है खुद को व्यस्त रखने के साथ साथ इनर वर्क करते हैँ  तो आप अधिक केंद्रित, उत्पादक, रचनात्मक पाएंगे  कम थके हुए पाएंगे और अपना बेस्ट या सर्वश्रेष्ठ दे पाएंगे
अपनी प्रतिभा के साथ साथ क्षमता का भी आकलन करें
हमारी क्षमता की कोई सीमा नहीं है। व्यावहारिक अर्थ में, मस्तिष्क हमारे पूरे जीवन तक बढ़ता और बदलता रह सकता है जो हम सोच सकते हैँ उसे साकार भी कर सकते हैं|
एक अच्छा प्रबंधक अच्छा कोच और अच्छा प्रेरेक आपकी प्रतिभा के साथ साथ आपकी क्षमता को भाम्प लेता है और उस कार्य और अभ्यास करने को उकसाता है और आप बेहतर करने लगते हैँ और क्षमता के अनुरूप कार्य मे सफल होतेहै
प्रतिभा बनाम क्षमता
प्रतिभा आपकी प्राकृतिक, स्वाभाविक या जन्मजात क्षमता है व्यक्तिगत योग्यता है जो आप के पास है
जबकि क्षमता या पॉटशियल क्षमता भविष्य को संदर्भित करती है। प्रतिभा वर्तमान को आप भविष्य कितना अधिक कर सकते हैं ये आपकी क्षमता है पॉटशियल है |
जीवन सार्थक करने के लिए लक्ष्य निर्धारित करें


आपके जीवन में यदि कोई लक्ष्य नहीं है तो कोई भी आपका सम्मान नहीं करेगा समझ में इस व्यक्ति का सम्मान होता है जो जिसके लक्ष्य होता है और निरंतर कार्यरत होता है
पर लक्ष्य के पीछे भागते-भागते हम सुख और शांति भी खो देते हैं सबसे पहले तो हमें खुद को पहचानना चाहिए हमारी क्षमताओं का आकलन होना चाहिए
लक्ष्य निर्धारित करने का अर्थ यह नहीं है कि आप कोई कोई भी बड़ा लक्ष्य पूजा लक्ष्य बना ले हैं और उसी के पीछे लग जाए लक्ष्य अपनी क्षमताओं के हिसाब से रखें यदि बड़ा लक्ष्य भी है तो उसे टुकड़ों में तोड़े पर्याप्त समय समय रखें ताकि आपको कोई जल्दबाजी न रहे और निराश ना हो लक्ष्य पूरा न होने पर बहुत तनाव होता है इसलिए छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं एक बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमेशा सकारात्मक रहे हैं पॉजिटिव सोचें ऐसा भी होता है या ऐसा भी समय आता है कि जब हम अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाते इसका अर्थ यानी कि अपने प्रयास ही नहीं किया या आप कुछ भी हासिल नहीं कर सकते सपना टूटने पर आप सपने देखना बंद ना करें सपने देखते रहें यह नहीं तो कोई और सही कोई दूसरा लक्ष्य बनाएं उसे आप जरूर प्राप्त कर लेंगे कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है

रविवार, 7 जनवरी 2024

प्रतियोगिता और जीत-हार जीवन का हिस्सा है

 प्रतियोगिता अर्थात कॉम्पिटिशन शादियों से से चलता रहा है कभी  उत्तराधिकारी चुनने, वर  चुनने का या फिर कोई अधिकारी या  नेता का चुनाव हो प्रतियोगिताएं होती रहतीहैं

मौजूद विकल्प में से किसी एक को चुनना बेहतर का चुनाव करना प्रतियोगिता का उद्देश्य होता है, प्रतियोगी  परीक्षाओं में  किसी एक सीट के लिए सौ से हजार लोग कॉम्पटीकरते हैं , फाइट करते हैं मिलती सिर्फ एक को है इसका मतलब ये नहीं कि बाकी 99 या 999 प्रतियोगी बेकार है सौ या हजार में से 10 से 100 लोग ऐसे होते हैं जो उस सीट को डिजर्व करते हैं जिसे मिली है उनके बराबर योग्यता रखते हैं पर इस बार अवसर उन्हें नहीं मिला अगली बार जरूर मिलेगा इसलिए हतोत्साहित हुए बिना रिस्टार्ट करें |
जो हारते,फेल होते  हैं या जिनको पद नहीं मिलता उनको समझना  चाहिए कि  खुद को सुधारने अधिक तैयारी और भूमिका बनाने और सीखने का समय मिला है
मंज़िल तक पहुंच कर भी न मिलना बहुत कष्ट देता है पर निराशा से कुछ नहीं हासिल होता अगले अवसर के लिए जुट जाएं  अगला अवसर आप को ही मिलेगा |
बहुत लोगों की कहानियां आप ने सुनी या पढ़ी होगी किसी फील्ड में चीज के लिए  1 साल 2 साल और 5 साल लगा दिए फिर उन्हें मिली कई लोगों नहीं इतने सालों में भी ĺनहीं मिली और  वो हार  नहीं  माने किसी दूसरे फील्ड में अच्छा कर रहें हैं  और सफल हैं
गोपाल दास नीरज जी की कविता की ये पंक्ति हमेशा याद रखिए
कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है

और हरिवंशराय बच्चन जी की कविता
जो बीत गई सो बात गई

अम्बर के आनन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
जो छूट गए फिर कहाँ मिले
पर बोलो टूटे तारों पर
कब अम्बर शोक मनाता है
जो बीत गई सो बात गई
#competition #lifestyle #karma

मंगलवार, 2 जनवरी 2024

दया, धैर्य, विनम्रता और सहनशीलता जीवन का मूलमंत्र है

एक शेर की वीरता तब और बढ़ जाती है जब भटक के आये हुए मेमने को दुलारकर पुचकार कर छोड़ देता है उस पर दया दिखता है
दया और सहनशक्ति हमें शक्तिशाली बनाती है
हिन्दी मीडियम के 11th क्लास इग्लिस सब्जेक्ट में विलियम सेक्सपियर की कविता थी मर्सी आप मे से बहुतों ने पढ़ी होगी जो 12th हिंदी मीडियम से पास हैं वो पढ़े होंगे जो 12th की के इंग्लिश सब्जेक्ट में शेक्सपियर के एक प्ले (नाटक) मर्चेन्ट ऑफ वेनिस का हिस्सा है जिसके प्रमुख पात्र एंटोनियो, पोर्शिया बासियानो औऱ सायलाक हैं पोरशिया सायलाक को मर्सी मतलब दया के बारे में बताती है वो बताती है दया देने वाले और प्राप्त करने वाले दोनों को सुख देता है और  भला करती है यदि दया एक राजा के ह्रदय में प्रेवेश करा दिया जाए तो वो धरती पर भगवान की तरह हो जाएगा। विनम्रता, धैर्य सहनशीलता और दया जीवन का मूलमंत्र है

विद्या ददाति विनयम
गहरा जल शांत होता है और फलों से लदे हुए पेड़ झुके होते हैं
अष्टावक्र ने कहा है जिसमें विनय नहीं वह विद्धवान नहीं।

सहनशीलता एक ऐसा सत्य है, जिससे प्राय: सभी लोगों को अपने जीवनकाल में रू-ब-रू होना पड़ता है। सहनशील होना एक गुण है, जिससे जीवन का वास्तविक विकास होता है।
सहनशीलता दया और त्याग परिवार से सीखने को मिलता है आज हमारे जीवन में दुख और तनाव हावी हैं। इसका परिणाम यह है कि हम थोड़े से कष्टों से शीघ्र घबरा जाते हैं, क्रोधित हो जाते हैं।
और क्रोध  मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है ।

सहनशील व्यक्ति बिगड़ते कार्य को भी संभाल ले जाते हैं। इसके विपरीत जिसमें सहनशीलता नहीं होती, उसे क्रोध आता है। क्रोध में बनते हुए कार्य भी बिगड़ जाते हैं। सहनशीलता का गुण व्यक्ति को तभी मिलता है, जब उसके अंदर अच्छे संस्कारों का समावेश हो

कविता-दंगा पीड़ित

 कविता  दंगापीड़ित ये भी था इक सपना, कि समाज से लुक भी प्यार मिले... पर मिली किताबें दुस्वारियां, और दोस्ती के घाव मिले... पल रहे हैं शिवरों...