भक्तिकाल को हिन्दी साहित्य का स्वर्ण युग कहा जाता है. यह हिन्दी साहित्य का एक महत्वपूर्ण काल है. इस काल में भक्ति की ऐसी धारा प्रवाहित हुई कि विद्वानों ने इसे हिन्दी साहित्य का स्वर्णकाल कहा. भक्तिकाल की कुछ खास बातेंः
• भक्तिकाल की दो प्रमुख शाखाएं हैं- सगुण और निर्गुण.• इस काल में अवधी और ब्रजभाषा का प्रयोग हुआ.
• भक्तिकाल के प्रमुख कवि हैं- तुलसीदास, कबीरदास, रहीम, मीरा, रसखान, मलिक मुहम्मद जायसी, सूरदास इत्यादि.
• इस काल में काव्य जीवन सापेक्ष और जनता के अधिक निकट था.
• इस काल में समाज सुधार के लिए काव्य लिखा गया.
• भक्तिकाल में लिखे गए कुछ प्रमुख ग्रंथ हैं- रामचरितमानस, पद्मावत, कवितावली, दोहावली, रामचरित संग्रह, भक्त माल, अष्टयाम.
भक्तिकाल के कुछ प्रमुख कवियों और उनके कामः
• कबीरदास की काव्य भाषा 'सधुक्कड़ी' कहलाती है.
• सूरदास के भ्रमरगीत में विप्रलम्भ श्रृंगार का अद्वितीय वर्णन है.
• कृष्णभक्ति शाखा के कवियों के काव्य का संग्रह विट्ठलनाथ ने किया, वह 'अष्टछाप
ईश्वर के सगुण और निर्गुण दोनों तरह से मानते हैं जैसे तुलसीदास जी सगुण उपासक थे और कबीर जी निर्गुण
तुलसीदास जी कहते हैं ईश्वर शून्य हो या अनंत है तो भी मै उन्हें एक रूप में पूजूँगा वहीँ
पदम श्री मालिनी अवस्थी जी को हम जानते हैं पर
कजरी, सोहर, चैती, लंगुरिया आदि लोकगीतों की प्रसिद्ध शैलियाँ हैं। सीढ़ने गीत विवाह के अवसर पर गाये जाने वाले गाली गीत [2]है।इसके अतिरिक्त संस्कार गीत,श्रम गीत,पर्व गीत, बिरहा, पूर्वी, झूमर, खेमटा भी भोजपुरी के परम्परागत लोकगीत हैं जिन्हें लोग अपने जीवन की धारा से जोड़कर संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं इसमें लोक गीतकारों व लोक गायकों का बहुत योगदान है
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