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शुक्रवार, 30 मई 2025

कविता-दंगा पीड़ित

 कविता 

दंगापीड़ित


ये भी था इक सपना,

कि समाज से लुक भी प्यार मिले...

पर मिली किताबें दुस्वारियां,

और दोस्ती के घाव मिले...

पल रहे हैं शिवरों में

जो देश का भविष्य है,

आशा थी जिसे प्रकाश की,

उन्हें बदले में अंधेरा मिले...

खुदगर्ज राजनीति के,

मासुम भी शिकार हुऎ...

क्या सोचेंगे राष्ट्रीय,

क्या समाज के लिए जियें,

बस कुंठित ना हो समाज से,

कदम कहीं..जो डगमगा गया... 


दंगा या किसी विशेष जाति या सत्ता के सताए लोगों की व्यथा और उसके परिणाम बहुत घातक होते हैं, प्रशासन प्रशासन की बैठक में उन्हें दोषी ठहराया जाता है या उनकी पहचान की जाती है तो ऐसा व्यक्ति या समुदाय सत्ता, शासन प्रशासन और मानवता से कुंठित हो जाते हैं और वो बदले की आग में जलते हैं और गलत कर शेयर करते हैं।


शनिवार, 24 मई 2025

Some Business thaught

 ग्राहक सेवा हमेशा से ही आपकी कंपनी के प्रतिनिधित्व का प्राथमिक चालक रही है। आपके ग्राहक की आपके प्रति वफ़ादारी को किस तरह से बढ़ावा मिलता है, से लेकर आपके ग्राहक आपके उत्पादों के लिए अपनी जेब कैसे खोलेंगे, सब कुछ आपकी ग्राहक सेवा पर निर्भर करता है।


अध्ययनों से पता चलता है कि 95% उपभोक्ता ब्रांड के चुनाव और ब्रांड के प्रति वफ़ादारी में ग्राहक सेवा को महत्वपूर्ण मानते हैं। बेहतरीन ग्राहक सेवा प्रदान करके और एक अच्छी ग्राहक सेवा भूमिका निभाकर , आप निश्चित रूप से बाज़ार पर राज करने के लिए अपने प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त हासिल करते हैं।

मैंने सीखा है कि लोग भूल जाएंगे कि आपने क्या कहा, लोग भूल जाएंगे कि आपने क्या किया, लेकिन लोग कभी नहीं भूलेंगे कि आपने उन्हें कैसा महसूस कराया" - माया एंजेलो



माया एंजेलो, एक कवि, एक नागरिक अधिकार कार्यकर्ता, 30 से अधिक पुस्तकों की लेखिका, 50 से अधिक मानद उपाधियों की प्राप्तकर्ता, और 30 स्पोकन वर्ड एल्बमों के लिए 3 ग्रैमी पुरस्कार विजेता। माया की टोपी पंखों से भरी हुई थी। उन्होंने एक सफल जीवन जिया और लाखों लोग उनसे, उनके काम से प्रेरणा लेते हैं।

असुविधा और आभाव को अपनी ताकत बनानी चाहिए

 आभाव, असुविधा, और मुश्किलें सब के जीवन मे हैं

पर जब हमें लगे कि हमारे साथ कुछ ज्यादा ही है
तो हमें समझ लेना चाहिए हमें अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है अधिक धैर्य रखने और समय देने की जरूरत है।
हाल ही मे फिजिक्स वाला के फाउंडर अलख पाण्डेय अलीगढ के एक लड़के गगन की सराहना और चर्चा करते हैं जो अलीगढ के अतरौली तहसील के गरीब परिवार से हैं और 2024 मे IIT मे अच्छा रैंक स्कोर कर के IIT BHU मे ECE ब्रांच मे एडमिशन लिया एक पुराने स्मार्ट फोन जिसकी स्क्रीन सालों से टूटी थी उसी से ऑनलाइन तैयारी की और IIT मे सेलेक्ट हुए
अलख पाण्डेय जी गगन को एक नया फोन दिया और उनकी पढ़ाई का खर्च पूरा करने का वादा किया
और इंट्रेस्टिंग बात ये है की गगन के पुराने स्क्रीन टूटे फोन को अपने पास रखा और कहा ये अन्य बच्चों को प्रेरित करने के लिए उन्हें दिखाने के लिए रखा.

अवधी भाषा का महत्व

 भक्तिकाल को हिन्दी साहित्य का स्वर्ण युग कहा जाता है. यह हिन्दी साहित्य का एक महत्वपूर्ण काल है. इस काल में भक्ति की ऐसी धारा प्रवाहित हुई कि विद्वानों ने इसे हिन्दी साहित्य का स्वर्णकाल कहा. भक्तिकाल की कुछ खास बातेंः 

• भक्तिकाल की दो प्रमुख शाखाएं हैं- सगुण और निर्गुण. 
• इस काल में अवधी और ब्रजभाषा का प्रयोग हुआ. 
• भक्तिकाल के प्रमुख कवि हैं- तुलसीदास, कबीरदास, रहीम, मीरा, रसखान, मलिक मुहम्मद जायसी, सूरदास इत्यादि. 
• इस काल में काव्य जीवन सापेक्ष और जनता के अधिक निकट था. 
• इस काल में समाज सुधार के लिए काव्य लिखा गया. 
• भक्तिकाल में लिखे गए कुछ प्रमुख ग्रंथ हैं- रामचरितमानस, पद्मावत, कवितावली, दोहावली, रामचरित संग्रह, भक्त माल, अष्टयाम. 
भक्तिकाल के कुछ प्रमुख कवियों और उनके कामः 
• कबीरदास की काव्य भाषा 'सधुक्कड़ी' कहलाती है.
• सूरदास के भ्रमरगीत में विप्रलम्भ श्रृंगार का अद्वितीय वर्णन है.
• कृष्णभक्ति शाखा के कवियों के काव्य का संग्रह विट्ठलनाथ ने किया, वह 'अष्टछाप
ईश्वर के सगुण और निर्गुण दोनों तरह से मानते हैं जैसे तुलसीदास जी सगुण उपासक थे और कबीर जी निर्गुण
तुलसीदास जी कहते हैं ईश्वर शून्य हो या अनंत है तो भी मै उन्हें एक रूप में पूजूँगा वहीँ 
पदम श्री मालिनी अवस्थी जी को हम जानते हैं पर
कजरी, सोहर, चैती, लंगुरिया आदि लोकगीतों की प्रसिद्ध शैलियाँ हैं। सीढ़ने गीत विवाह के अवसर पर गाये जाने वाले गाली गीत [2]है।इसके अतिरिक्त संस्कार गीत,श्रम गीत,पर्व गीत, बिरहा, पूर्वी, झूमर, खेमटा भी भोजपुरी के परम्परागत लोकगीत हैं जिन्हें लोग अपने जीवन की धारा से जोड़कर संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं इसमें लोक गीतकारों व लोक गायकों का बहुत योगदान है

कविता-दंगा पीड़ित

 कविता  दंगापीड़ित ये भी था इक सपना, कि समाज से लुक भी प्यार मिले... पर मिली किताबें दुस्वारियां, और दोस्ती के घाव मिले... पल रहे हैं शिवरों...