प्रतियोगिता अर्थात कॉम्पिटिशन शादियों से से चलता रहा है कभी उत्तराधिकारी चुनने, वर चुनने का या फिर कोई अधिकारी या नेता का चुनाव हो प्रतियोगिताएं होती रहतीहैं
मौजूद विकल्प में से किसी एक को चुनना बेहतर का चुनाव करना प्रतियोगिता का उद्देश्य होता है, प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी एक सीट के लिए सौ से हजार लोग कॉम्पटीकरते हैं , फाइट करते हैं मिलती सिर्फ एक को है इसका मतलब ये नहीं कि बाकी 99 या 999 प्रतियोगी बेकार है सौ या हजार में से 10 से 100 लोग ऐसे होते हैं जो उस सीट को डिजर्व करते हैं जिसे मिली है उनके बराबर योग्यता रखते हैं पर इस बार अवसर उन्हें नहीं मिला अगली बार जरूर मिलेगा इसलिए हतोत्साहित हुए बिना रिस्टार्ट करें |जो हारते,फेल होते हैं या जिनको पद नहीं मिलता उनको समझना चाहिए कि खुद को सुधारने अधिक तैयारी और भूमिका बनाने और सीखने का समय मिला है
मंज़िल तक पहुंच कर भी न मिलना बहुत कष्ट देता है पर निराशा से कुछ नहीं हासिल होता अगले अवसर के लिए जुट जाएं अगला अवसर आप को ही मिलेगा |
बहुत लोगों की कहानियां आप ने सुनी या पढ़ी होगी किसी फील्ड में चीज के लिए 1 साल 2 साल और 5 साल लगा दिए फिर उन्हें मिली कई लोगों नहीं इतने सालों में भी ĺनहीं मिली और वो हार नहीं माने किसी दूसरे फील्ड में अच्छा कर रहें हैं और सफल हैं
गोपाल दास नीरज जी की कविता की ये पंक्ति हमेशा याद रखिए
कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है
और हरिवंशराय बच्चन जी की कविता
जो बीत गई सो बात गई
अम्बर के आनन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
जो छूट गए फिर कहाँ मिले
पर बोलो टूटे तारों पर
कब अम्बर शोक मनाता है
जो बीत गई सो बात गई
#competition #lifestyle #karma
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