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शनिवार, 24 मई 2025

Some Business thaught

 ग्राहक सेवा हमेशा से ही आपकी कंपनी के प्रतिनिधित्व का प्राथमिक चालक रही है। आपके ग्राहक की आपके प्रति वफ़ादारी को किस तरह से बढ़ावा मिलता है, से लेकर आपके ग्राहक आपके उत्पादों के लिए अपनी जेब कैसे खोलेंगे, सब कुछ आपकी ग्राहक सेवा पर निर्भर करता है।


अध्ययनों से पता चलता है कि 95% उपभोक्ता ब्रांड के चुनाव और ब्रांड के प्रति वफ़ादारी में ग्राहक सेवा को महत्वपूर्ण मानते हैं। बेहतरीन ग्राहक सेवा प्रदान करके और एक अच्छी ग्राहक सेवा भूमिका निभाकर , आप निश्चित रूप से बाज़ार पर राज करने के लिए अपने प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त हासिल करते हैं।

मैंने सीखा है कि लोग भूल जाएंगे कि आपने क्या कहा, लोग भूल जाएंगे कि आपने क्या किया, लेकिन लोग कभी नहीं भूलेंगे कि आपने उन्हें कैसा महसूस कराया" - माया एंजेलो



माया एंजेलो, एक कवि, एक नागरिक अधिकार कार्यकर्ता, 30 से अधिक पुस्तकों की लेखिका, 50 से अधिक मानद उपाधियों की प्राप्तकर्ता, और 30 स्पोकन वर्ड एल्बमों के लिए 3 ग्रैमी पुरस्कार विजेता। माया की टोपी पंखों से भरी हुई थी। उन्होंने एक सफल जीवन जिया और लाखों लोग उनसे, उनके काम से प्रेरणा लेते हैं।

असुविधा और आभाव को अपनी ताकत बनानी चाहिए

 आभाव, असुविधा, और मुश्किलें सब के जीवन मे हैं

पर जब हमें लगे कि हमारे साथ कुछ ज्यादा ही है
तो हमें समझ लेना चाहिए हमें अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है अधिक धैर्य रखने और समय देने की जरूरत है।
हाल ही मे फिजिक्स वाला के फाउंडर अलख पाण्डेय अलीगढ के एक लड़के गगन की सराहना और चर्चा करते हैं जो अलीगढ के अतरौली तहसील के गरीब परिवार से हैं और 2024 मे IIT मे अच्छा रैंक स्कोर कर के IIT BHU मे ECE ब्रांच मे एडमिशन लिया एक पुराने स्मार्ट फोन जिसकी स्क्रीन सालों से टूटी थी उसी से ऑनलाइन तैयारी की और IIT मे सेलेक्ट हुए
अलख पाण्डेय जी गगन को एक नया फोन दिया और उनकी पढ़ाई का खर्च पूरा करने का वादा किया
और इंट्रेस्टिंग बात ये है की गगन के पुराने स्क्रीन टूटे फोन को अपने पास रखा और कहा ये अन्य बच्चों को प्रेरित करने के लिए उन्हें दिखाने के लिए रखा.

अवधी भाषा का महत्व

 भक्तिकाल को हिन्दी साहित्य का स्वर्ण युग कहा जाता है. यह हिन्दी साहित्य का एक महत्वपूर्ण काल है. इस काल में भक्ति की ऐसी धारा प्रवाहित हुई कि विद्वानों ने इसे हिन्दी साहित्य का स्वर्णकाल कहा. भक्तिकाल की कुछ खास बातेंः 

• भक्तिकाल की दो प्रमुख शाखाएं हैं- सगुण और निर्गुण. 
• इस काल में अवधी और ब्रजभाषा का प्रयोग हुआ. 
• भक्तिकाल के प्रमुख कवि हैं- तुलसीदास, कबीरदास, रहीम, मीरा, रसखान, मलिक मुहम्मद जायसी, सूरदास इत्यादि. 
• इस काल में काव्य जीवन सापेक्ष और जनता के अधिक निकट था. 
• इस काल में समाज सुधार के लिए काव्य लिखा गया. 
• भक्तिकाल में लिखे गए कुछ प्रमुख ग्रंथ हैं- रामचरितमानस, पद्मावत, कवितावली, दोहावली, रामचरित संग्रह, भक्त माल, अष्टयाम. 
भक्तिकाल के कुछ प्रमुख कवियों और उनके कामः 
• कबीरदास की काव्य भाषा 'सधुक्कड़ी' कहलाती है.
• सूरदास के भ्रमरगीत में विप्रलम्भ श्रृंगार का अद्वितीय वर्णन है.
• कृष्णभक्ति शाखा के कवियों के काव्य का संग्रह विट्ठलनाथ ने किया, वह 'अष्टछाप
ईश्वर के सगुण और निर्गुण दोनों तरह से मानते हैं जैसे तुलसीदास जी सगुण उपासक थे और कबीर जी निर्गुण
तुलसीदास जी कहते हैं ईश्वर शून्य हो या अनंत है तो भी मै उन्हें एक रूप में पूजूँगा वहीँ 
पदम श्री मालिनी अवस्थी जी को हम जानते हैं पर
कजरी, सोहर, चैती, लंगुरिया आदि लोकगीतों की प्रसिद्ध शैलियाँ हैं। सीढ़ने गीत विवाह के अवसर पर गाये जाने वाले गाली गीत [2]है।इसके अतिरिक्त संस्कार गीत,श्रम गीत,पर्व गीत, बिरहा, पूर्वी, झूमर, खेमटा भी भोजपुरी के परम्परागत लोकगीत हैं जिन्हें लोग अपने जीवन की धारा से जोड़कर संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं इसमें लोक गीतकारों व लोक गायकों का बहुत योगदान है

रविवार, 28 जनवरी 2024

प्रतिभा बनाम क्षमता और सफल जीवन का राज


आत्म बोध 

जीवन को अधिक, स्पष्टता,  उद्देश्य और जुनून के साथ जीने की इस यात्रा को आत्म-बोध कहा जाता है। हमें हमारी मानवीय क्षमता को समझना इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 
अपनी क्षमता का विकास करना एक सक्रिय प्रक्रिया है जो जीवन भर चलती रहती है
अपने काम का सम्मान करें 
आप जो काम कर रहे हैं उसे पूरे मन और सम्पूर्णता से करें उसमें आत्म सम्मान और और गर्व महसूस करें। याद रखें कि यह यात्रा आपके लिए है, किसी और के लिए नहीं।
रोज कुछ नया सीखें और अभ्यास करते रहें
ज़ब आप रोज कुछ सीखते हैँ  रोज अभ्यास करते है खुद को व्यस्त रखने के साथ साथ इनर वर्क करते हैँ  तो आप अधिक केंद्रित, उत्पादक, रचनात्मक पाएंगे  कम थके हुए पाएंगे और अपना बेस्ट या सर्वश्रेष्ठ दे पाएंगे
अपनी प्रतिभा के साथ साथ क्षमता का भी आकलन करें
हमारी क्षमता की कोई सीमा नहीं है। व्यावहारिक अर्थ में, मस्तिष्क हमारे पूरे जीवन तक बढ़ता और बदलता रह सकता है जो हम सोच सकते हैँ उसे साकार भी कर सकते हैं|
एक अच्छा प्रबंधक अच्छा कोच और अच्छा प्रेरेक आपकी प्रतिभा के साथ साथ आपकी क्षमता को भाम्प लेता है और उस कार्य और अभ्यास करने को उकसाता है और आप बेहतर करने लगते हैँ और क्षमता के अनुरूप कार्य मे सफल होतेहै
प्रतिभा बनाम क्षमता
प्रतिभा आपकी प्राकृतिक, स्वाभाविक या जन्मजात क्षमता है व्यक्तिगत योग्यता है जो आप के पास है
जबकि क्षमता या पॉटशियल क्षमता भविष्य को संदर्भित करती है। प्रतिभा वर्तमान को आप भविष्य कितना अधिक कर सकते हैं ये आपकी क्षमता है पॉटशियल है |
जीवन सार्थक करने के लिए लक्ष्य निर्धारित करें


आपके जीवन में यदि कोई लक्ष्य नहीं है तो कोई भी आपका सम्मान नहीं करेगा समझ में इस व्यक्ति का सम्मान होता है जो जिसके लक्ष्य होता है और निरंतर कार्यरत होता है
पर लक्ष्य के पीछे भागते-भागते हम सुख और शांति भी खो देते हैं सबसे पहले तो हमें खुद को पहचानना चाहिए हमारी क्षमताओं का आकलन होना चाहिए
लक्ष्य निर्धारित करने का अर्थ यह नहीं है कि आप कोई कोई भी बड़ा लक्ष्य पूजा लक्ष्य बना ले हैं और उसी के पीछे लग जाए लक्ष्य अपनी क्षमताओं के हिसाब से रखें यदि बड़ा लक्ष्य भी है तो उसे टुकड़ों में तोड़े पर्याप्त समय समय रखें ताकि आपको कोई जल्दबाजी न रहे और निराश ना हो लक्ष्य पूरा न होने पर बहुत तनाव होता है इसलिए छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं एक बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमेशा सकारात्मक रहे हैं पॉजिटिव सोचें ऐसा भी होता है या ऐसा भी समय आता है कि जब हम अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाते इसका अर्थ यानी कि अपने प्रयास ही नहीं किया या आप कुछ भी हासिल नहीं कर सकते सपना टूटने पर आप सपने देखना बंद ना करें सपने देखते रहें यह नहीं तो कोई और सही कोई दूसरा लक्ष्य बनाएं उसे आप जरूर प्राप्त कर लेंगे कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है

रविवार, 7 जनवरी 2024

प्रतियोगिता और जीत-हार जीवन का हिस्सा है

 प्रतियोगिता अर्थात कॉम्पिटिशन शादियों से से चलता रहा है कभी  उत्तराधिकारी चुनने, वर  चुनने का या फिर कोई अधिकारी या  नेता का चुनाव हो प्रतियोगिताएं होती रहतीहैं

मौजूद विकल्प में से किसी एक को चुनना बेहतर का चुनाव करना प्रतियोगिता का उद्देश्य होता है, प्रतियोगी  परीक्षाओं में  किसी एक सीट के लिए सौ से हजार लोग कॉम्पटीकरते हैं , फाइट करते हैं मिलती सिर्फ एक को है इसका मतलब ये नहीं कि बाकी 99 या 999 प्रतियोगी बेकार है सौ या हजार में से 10 से 100 लोग ऐसे होते हैं जो उस सीट को डिजर्व करते हैं जिसे मिली है उनके बराबर योग्यता रखते हैं पर इस बार अवसर उन्हें नहीं मिला अगली बार जरूर मिलेगा इसलिए हतोत्साहित हुए बिना रिस्टार्ट करें |
जो हारते,फेल होते  हैं या जिनको पद नहीं मिलता उनको समझना  चाहिए कि  खुद को सुधारने अधिक तैयारी और भूमिका बनाने और सीखने का समय मिला है
मंज़िल तक पहुंच कर भी न मिलना बहुत कष्ट देता है पर निराशा से कुछ नहीं हासिल होता अगले अवसर के लिए जुट जाएं  अगला अवसर आप को ही मिलेगा |
बहुत लोगों की कहानियां आप ने सुनी या पढ़ी होगी किसी फील्ड में चीज के लिए  1 साल 2 साल और 5 साल लगा दिए फिर उन्हें मिली कई लोगों नहीं इतने सालों में भी ĺनहीं मिली और  वो हार  नहीं  माने किसी दूसरे फील्ड में अच्छा कर रहें हैं  और सफल हैं
गोपाल दास नीरज जी की कविता की ये पंक्ति हमेशा याद रखिए
कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है

और हरिवंशराय बच्चन जी की कविता
जो बीत गई सो बात गई

अम्बर के आनन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
जो छूट गए फिर कहाँ मिले
पर बोलो टूटे तारों पर
कब अम्बर शोक मनाता है
जो बीत गई सो बात गई
#competition #lifestyle #karma

मंगलवार, 2 जनवरी 2024

दया, धैर्य, विनम्रता और सहनशीलता जीवन का मूलमंत्र है

एक शेर की वीरता तब और बढ़ जाती है जब भटक के आये हुए मेमने को दुलारकर पुचकार कर छोड़ देता है उस पर दया दिखता है
दया और सहनशक्ति हमें शक्तिशाली बनाती है
हिन्दी मीडियम के 11th क्लास इग्लिस सब्जेक्ट में विलियम सेक्सपियर की कविता थी मर्सी आप मे से बहुतों ने पढ़ी होगी जो 12th हिंदी मीडियम से पास हैं वो पढ़े होंगे जो 12th की के इंग्लिश सब्जेक्ट में शेक्सपियर के एक प्ले (नाटक) मर्चेन्ट ऑफ वेनिस का हिस्सा है जिसके प्रमुख पात्र एंटोनियो, पोर्शिया बासियानो औऱ सायलाक हैं पोरशिया सायलाक को मर्सी मतलब दया के बारे में बताती है वो बताती है दया देने वाले और प्राप्त करने वाले दोनों को सुख देता है और  भला करती है यदि दया एक राजा के ह्रदय में प्रेवेश करा दिया जाए तो वो धरती पर भगवान की तरह हो जाएगा। विनम्रता, धैर्य सहनशीलता और दया जीवन का मूलमंत्र है

विद्या ददाति विनयम
गहरा जल शांत होता है और फलों से लदे हुए पेड़ झुके होते हैं
अष्टावक्र ने कहा है जिसमें विनय नहीं वह विद्धवान नहीं।

सहनशीलता एक ऐसा सत्य है, जिससे प्राय: सभी लोगों को अपने जीवनकाल में रू-ब-रू होना पड़ता है। सहनशील होना एक गुण है, जिससे जीवन का वास्तविक विकास होता है।
सहनशीलता दया और त्याग परिवार से सीखने को मिलता है आज हमारे जीवन में दुख और तनाव हावी हैं। इसका परिणाम यह है कि हम थोड़े से कष्टों से शीघ्र घबरा जाते हैं, क्रोधित हो जाते हैं।
और क्रोध  मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है ।

सहनशील व्यक्ति बिगड़ते कार्य को भी संभाल ले जाते हैं। इसके विपरीत जिसमें सहनशीलता नहीं होती, उसे क्रोध आता है। क्रोध में बनते हुए कार्य भी बिगड़ जाते हैं। सहनशीलता का गुण व्यक्ति को तभी मिलता है, जब उसके अंदर अच्छे संस्कारों का समावेश हो

सोमवार, 11 दिसंबर 2023

जीवन क्या है, जीवन का उद्देश्य, जीवनशैली व सफल और सार्थक जीवन का राज


कुछ शब्दों, चीज़ों या विषयों को परिभाषित करना मुश्किल है
जैसे प्रेम, मित्रता और जीवन 
इन शब्दों का कोई सार्वभौम परिभाषा नहीं है।
इस लेख में बात करेंगे जीवन पर विशेषता मानव जीवन पर 
जीवन की परिभाषा लंबे समय से वैज्ञानिकों और दार्शनिकों के लिए एक चुनौती रही है। यह आंशिक रूप से इसलिए है क्योंकि जीवन एक प्रक्रिया है, पदार्थ नहीं। यह जीवों की विशेषताओं के ज्ञान की कमी से जटिल है।
जीव विज्ञान के अनुसार जीवन की विभिन्न संस्थाओं को प्रायः खुले तन्त्र के रूप में माना जाता है जो समस्थापन को बनाए रखते हैं, कोशिकाओं से बने होते हैं, एक जीवन चक्र होता है, चयापचय से गुजरता है, बढ़ सकता है, अपने पर्यावरण के अनुकूल हो सकता है, उद्दीपकों का प्रतिक्रिया दे सकता है, जनन कर सकता है और कई पीढ़ियों से क्रम विकसित हो सकता है। बात करते हैं मनुष्य के जीवन की उसके पहलुओं, उद्देश्य और  सार्थक और सफल जीवन की कुछ दार्शनिकों और विशेषज्ञों ने कुछ सटीक परिभाषाएँ दी हैं जो  काफी हद तक ठीक है पर हर स्थिति या हर व्यक्ति के लिए सही नहीं बैठती।
अगर आप गूगल करेंगे तो पाएंगे जीवन का  अर्थ-"जीवित दशा",  जीवित होना या ज़िंदगी।
जीवन एक कैनवस है जिसे आप अपने सपनो से भरते हैं।
चलना ही जीवन है अर्थात जीवन एक यात्रा है, सीखना ही जीवन है, जीवन एक संघर्ष है । असल मे जीवन ये सब है इन सब का समुच्चय है ।
एक बेघर, बेरोजगार और उसके परिवार के लिए  जीवन अर्थ दो बार  के भोजन और  तन ढकने के कपडे और अगला दिन फिर इसी  कार्य  में लगने से ज्यादा कुछ नहीं ।
किसी बीमारी से जूझ रहे या मरणासन्न व्यक्ती के लिए सांसे चलती रहे और जल्द स्वस्थ होना ही जीवन है। 
समान्य आदमी जिसके बेसिक नीड्स पूरे हैं उसके लिए जीवन का मतलब सपने देखना और उसे पूरा करने का संकल्प और संघर्ष है जीवन ।
वहीँ जिसके पास पहले से सब कुछ है अच्छा व्यवसाय, बंगले, गाड़ियां और बैंक बैलेंस उसके लिए जीवन आसान और मौज मस्ती है भोगना ही जीवन है।
कोई सब कुछ छोड़कर संन्यास में जीवन ढूंढता है।
हर व्यक्ति और स्थिति के लिए जीवन की अलग परिभाषाएं हैं एक ही व्यक्ति अलग अलग स्थिति में जीवन को अनुभव और परिभाषित करता है ।
जीवन का हर दिन  अप्रत्याशित, अद्भुत और अकल्पनीय है 
हमारे सोचने, समझने और मानने पर भी जीवन  निर्भर कर्ता है 
हम जैसा सोचते हैं वैसा बन जाते हैं और हमारा जीवन वैसे ही बन जाता है।
जीवन का अर्थ है  सचेत होना, चेतना 
अपनी क्षमता के अनुसार दुनिया को कुछ दे जाना। अपने जन्म को सार्थक करना, मानव जन्म को व्यर्थ न जाने देना।



जीवन मे  बैलेंस  अर्थात संतुलन बहुत जरूरी है बचपन मे हम सब ने  सूयी धागा और मूंह में चम्मच दबाकर उसमें कंचे रखकर दौड़ में हिस्सा लिया होगा इस दौड़ में एक फिनिशिंग लाइन होती है ।सूयी में धागा डालते हुए या  चम्मच पर कंचे या नींबु रखकर मुंह मे दबाकर दौड़ना होता है सबसे पहले फिनिशिंग लाइन पहुंचने वाला नहीं जीतता बल्कि वो जीतता है जो सूई में धागा डाल देता है या चम्मच से कंचे गिराए बिना फिनिशिंग लाइन पर सबसे पहले पहुंचाता है विजेता वहीं होता है 
आप सफल  तभी हैं जब पद प्रतिष्ठा और पैसे के साथ साथ परिवार स्वास्थ्य, रिश्तों  और समाज में भी संतुलन बनाए रखते हैं ।
जापानी लेखक हेक्टर गार्सिया और फ्रांसिस मिरेलस द्वारा लिखी गयी पुस्तक इकिगाई जिसका अर्थ है सार्थक जीवन या उद्देश्य पूर्ण जीवन, जिसमें जापान के दक्षिण इलाके के टापू ओकिनावा के लोगों के जीवनशैली पर विस्तार से लिखा और समझाया है। दुनिया के सबसे स्वस्थ और लम्बी उम्र के लोग यहाँ रहते हैं। इस पुस्तक में जीवन को समझने और इसे सार्थक और उद्देश्यपूर्णपूर्ण बनाने पर चर्चा की गई है।
इकिगाई के अनुसार जब हम 20 की उम्र पार करते हैं  तभी से हमारे न्यूरॉन्स ( दिमाग की पेशियां या नर्व सेल्स )वयस्क होने लगती है बौद्धिक व्यायाम, जिज्ञासा और सीखने की इच्छा इत्यादि चीजों की वजह से न्यूरान्स के वयस्क होने की प्रक्रिया धीमी पड़ने लगती है जिस से हमें सकारात्मक नजरिया व ऊर्जा मिलती है और हमारी उम्र लम्बी होती है।
अपने मन और शरीर को को सक्रिय रखना एक स्वस्थ और 
लंबी उम्र का मंत्र है। 
प्रकृति का हर उत्पादन अदुतीय है और उसकी अपनी उपयोगिता है।
हम में से हर किसी के पास असाधारण और महान कार्य करने की क्षमता है, हम उस महान लक्ष्य को प्राप्त करेंगे या नहीं यह इस पर निर्भर नहीं करता कि हम किस परिस्थिति में हैं बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि हम उस परिस्थिति में क्या निर्णय लेते हैं ।
जीवन सफल और आसान बनाने के लिए आवश्यक है हम सामाजिक रहें ,जिम्मेदारी लेकर निर्णय लें
 समस्याओं को सुलझाने की क्षमता या कुशलता सीखें
 एडजस्ट ( सामंजस्य) करने की क्षमता वा कुशलता विकसित करें, यही जीने का तारिका है ।
जीवन सुख-दुःख का संगम है और प्रकृति हमें सर्वाइव करना सिखाती है संधर्ष करना सिखाती है जीवन संघर्षो की एक शृंखला है ।
अच्छे समय, खुशियों और उपलब्धियों के साथ-साथ विषम परिस्थितियां, प्रतिकूलतायें और दुःख भी आएगा ये जीवन का हिस्सा है। याद रखें जो टूट कर विखरते हैं वही मसीहा बनकर निखरते हैं l

श्याम नन्दन पाण्डेय
मनकापुर, गोण्डा
   उत्तर प्रदेश

कविता-दंगा पीड़ित

 कविता  दंगापीड़ित ये भी था इक सपना, कि समाज से लुक भी प्यार मिले... पर मिली किताबें दुस्वारियां, और दोस्ती के घाव मिले... पल रहे हैं शिवरों...